Monday, December 26, 2011

बहुत याद आते हैं पापा...


( डॉक्टर एस पी सिंह )
( 5-8-1954----28-03-2011)
  • एक अद्भुत इंसान, पिता और मित्र, 
  • आप हमेशा याद आएँगे
  • डॉक्टर एस पी सिंह फाउंडेशन आपके देखे हर सपने को पूरा करने की भरपूर कोशिश करेगा पापा. 

जिंदगी की किताब से डीलीट करना चाहूँगा 2011

एक साल जिसे जिंदगी मे कभी याद नही करना चाहूँगा , मेरे सबसे प्यारे दोस्त, एक शानदार इंसान और मेरेपिता को मुझसे छीना , दिल्ली मे मेरे सबसे अज़ीज आलोक तोमर सर को छीना, स्टीव जॉब्स को छीनाऔर जाते जाते आदम गोंदवी को हमसे दूर ले गया, एक साल जिसे फिर कभी याद नही करना चाहूँगा, बुरा, बहुत बुरा.. बहुत गुस्से मे हूँ, 2011 इसे जिंदगी की किताब से डीलीट करना  चाहूँगा.. 2012 मे अपने पापा के नाम पर डॉक्टर एस पी सिंह फाउंडेशन खोलना चाहूँगा, ये उनके लिए काम करेगा जिनके सर पर पिता का साया नही है,  .एक ऐसा साल जिसने मेरी जिंदगी बदल दी, 

हृदयेंद्र 

Thursday, July 22, 2010

वीरेन दा का सम्मान





हमारे प्यारे, दुलारे और अभिभावक वीरेन दा ( वीरेन डंगवाल जी) का सम्मान समारोह तारीख २३ जुलाई को बरेली कॉलेज सभागार में सुबह ११ बजे से होगा, आप सब सादर आमंत्रित हैं...


हृदयेंद्र


बरेली

बेहतर जिंदगी जीने के लिए कुछ जरूरी लाइंस

जिंदगी कैसे जिये इसको लेकर बड़ी जद्दोजहद चलती रहती है, बिना कलुष के कुंठा के बेहतर जीवन जीने की आकांक्षा सबकी होती है मेरी भी, कई बार बेहद अच्छा और सार्थक जीवन जीने के चक्कर में जिंदगी का कबाड़ा भी बना लेता हूँ, लेकिन कहीं लिखी देखी इन लाइनों नें कुछ दिन का दाना पानी जिन्दगी को मुहैय्या करा दिया है,
बस इन लाइंस के लिए विंसेट वान गाग को दिल से शुक्रिया कहना चाहता हूँ...वो लाइंस आप भी पढ़िए और हो सके तो जीवन में उतार लीजिये...मजा आएगा...मुझे लगता है...

दुनिया में काम करने के लिए आदमी को अपने ही भीतर मरना पड़ता है, आदमी इस दुनिया में सिर्फ खुश होने नहीं आया है, वह ऐसे ही इमानदार बनने को भी नहीं आया है, वह पूरी मानवता के लिए महान चीजें बनाने के लिए आया है, वह उदारता प्राप्त करने को आया है, वह उस बेहूदगी को पार करने आया है जिसमे ज्यादातर लोगों का अस्तित्व घिसट ता रहता है
(विंसेट वान गाग की जीवनी लस्ट फॉर लाइफ से ली पंक्तियाँ )
हृदयेंद्र

Sunday, July 18, 2010

खतरे में हमारा मसीहा...


कभी पत्रकार बनने का सोचा भी नहीं था फिर भी एक ही पत्रकार को जनता था आलोक तोमर, दूसरों को बिन मांगी सलाह देता था की आलोक तोमर को कभी पढ़ा है, पता नहीं कितनो को उत्सुकता से अलोक सर के लिखे लेख पढ़ा दिए, पत्रकारिता में प्रभाष जी राम थे तो आलोक सर हनुमान थे हमारे लिए, भगवान् का दर्जा दोनों का है, इश्वर ने भी सुनी और एक दिन मेरे मसीहा से मुलाकात भी करा दी, दिल के तार कुछ यूँ जुड़े की बस उनका ही होकर रह गया, बहुतों को डर लगता हैं उनसे, अपन कभी डरे ही नहीं, बल्कि हर बार अधिकार से कही, इतना बड़ा पत्रकार, उतना बड़ा पत्रकार जैसी चीज कभी रही नहीं हमारे बीच, ये जानते हुए भी की मेरी उम्र के बराबर उनका अनुभव होगा, बस एक स्नेह की डोर जो हमेशा मजबूत और मजबूत होती चली गयी, आलोक तोमर आलोक सर कब हो गए पता नहीं चला, हमेशा किसी जैसा होने के खिलाफ रहा, पर पता नहीं क्यूँ उन जैसा हमेशा होना चाहा १९ जुलाई को खबर सुनी आलोक सर के बीमार होने की ॥ आलोक तोमर को गले का कैंसर नामसे खबर चिपकी हुयी है एक साईट पर , प्रभाष जी के जाने का झटका अभी तक दिल झेल नहीं पाया था की ये बुरी खबर झेलनी पड़ रही है, मुझ जैसे तमाम लोग भारत और उसके कई कोनो में मौजूद हैं, जिनके लिए एक संबल, लड़ाकू पत्रकारिता का पितामह और एक मार्ग दर्शक हैं आलोक तोमर... हम जैसों के लिए मसीहा हैं वे अब जिम्मेदारी हमारी है की इस संकट की घडी में आलोक सर के साथ पूरी शिद्दत के साथ खड़ा हुआ जाये, इस वट वृक्ष को हर हाल में बचाना होगा हमें, अपने संबल से, अपने हौसले से और अपनी दुआओं से, इश्वर से दुआ कीजिये की पत्रकारिता का ये यौद्धा फिर से स्वस्थ होकर हमारा मार्गदर्शन करे... हमें रास्ता दिखाए, लड़ने, भिड़ने का हौसला दे फिर से... ढेर सारी दुवायें कीजिये और आलोक सर को हौसला दीजिये जिस तरह से हो सकती है उनकी मदद कीजिये... उनसे aloktomar@hotmail.com पर संपर्क कर उन्हें अपनी शुभ कामनाएं और प्यार दे सकते हैं.. हृदयेंद्र

फुहार

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प्यार करता हूँ सबसे, आपकी कोई भी मदद बिना नफा नुक्सान सोचे कर दूंगा, अपने गुस्से से बहुत डर लगता है, हमेशा कोशिश रहती है की बस ''गुस्सा'' न आये मुझे, लोग मुझे बहुत अच्छे दोस्त, शरीफ इंसान और एक इमानदार दुश्मन के तौर पर याद रखते हैं, एक बार दुश्मनी कीजिये, देखिये कितनी इमानदारी से ये काम भी करता हूँ,