Friday, March 23, 2012

शुक्रिया भगत सिंह

बेहद शर्मनाक रहा आज का दिन,


सुबह से फेसबुक पर नवरात्रि की बधाइयाँ देनेवालों की लाइन लगी है, किसी नामुराद को ये तक याद नही की आज के दिन तीन

होनहार नौजवानों को फाँसी पर चढ़ा दिया गया,

' उनका कसूर सिर्फ़ इतना था की वो ''हमारे लिए आज़ादी चाहते थे'

घिन आई की मैं उस समाज का हिस्सा हूँ जो नवरात्रों जैसी घिसी पिटी

परंपरा को ढोने के लिए तैयार हैं लेकिन उन्हे शुक्रिया कहने का वक़्त नही जिन्होने हमारी बेहतर... जिंदगी के लिए अपनी जान दे दी..दिल से शुक्रिया डा. हर्षवर्धन, ( सीनियर बीजेपी लीडर), की आज सुबह सुबह आपने अपनी फेसबुक वॉल पर इन शहीदों की कुर्बानी की याद दिलाई बहुत मिस करता हूँ भगत सिंह आपको, इस देश मे एक ही मर्द हुआ है वो आप है, हो सके तो इन्हे दिल से याद कीजिए नवरात्रे तो फिर आ जाएँगे लेकिन आज़ादी दुबारा नही मिलेगी....

हृदयेंद्र



Monday, December 26, 2011

बहुत याद आते हैं पापा...


( डॉक्टर एस पी सिंह )
( 5-8-1954----28-03-2011)
  • एक अद्भुत इंसान, पिता और मित्र, 
  • आप हमेशा याद आएँगे
  • डॉक्टर एस पी सिंह फाउंडेशन आपके देखे हर सपने को पूरा करने की भरपूर कोशिश करेगा पापा. 

जिंदगी की किताब से डीलीट करना चाहूँगा 2011

एक साल जिसे जिंदगी मे कभी याद नही करना चाहूँगा , मेरे सबसे प्यारे दोस्त, एक शानदार इंसान और मेरेपिता को मुझसे छीना , दिल्ली मे मेरे सबसे अज़ीज आलोक तोमर सर को छीना, स्टीव जॉब्स को छीनाऔर जाते जाते आदम गोंदवी को हमसे दूर ले गया, एक साल जिसे फिर कभी याद नही करना चाहूँगा, बुरा, बहुत बुरा.. बहुत गुस्से मे हूँ, 2011 इसे जिंदगी की किताब से डीलीट करना  चाहूँगा.. 2012 मे अपने पापा के नाम पर डॉक्टर एस पी सिंह फाउंडेशन खोलना चाहूँगा, ये उनके लिए काम करेगा जिनके सर पर पिता का साया नही है,  .एक ऐसा साल जिसने मेरी जिंदगी बदल दी, 

हृदयेंद्र 

फुहार

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प्यार करता हूँ सबसे, आपकी कोई भी मदद बिना नफा नुक्सान सोचे कर दूंगा, अपने गुस्से से बहुत डर लगता है, हमेशा कोशिश रहती है की बस ''गुस्सा'' न आये मुझे, लोग मुझे बहुत अच्छे दोस्त, शरीफ इंसान और एक इमानदार दुश्मन के तौर पर याद रखते हैं, एक बार दुश्मनी कीजिये, देखिये कितनी इमानदारी से ये काम भी करता हूँ,